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बटन मशरूम

 

  बटन मशरूम


बटन मशरूम उगाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के महीने में होता है, इन छ: महीनों में दो फसलें उगाई जाती हैं. बटन खुम्बी की फसल के लिए आरम्भ में 220-260 तापमान की आवश्यकता होती है, इस ताप पर कवक जाल बहुत तेजी से बढ़ता है बाद में इसके लिए 140-180 ताप ही उपयुक्त रहता है. इससे कम ताप पर फलनकाय की बढ़वार बहुत धीमी हो जाती है


बटन मशरूम उत्पादन की उन्नत तकनीक

01 August, 2018 12:00 AM

भारत में मशरूम की खेती का प्रचलन दिन प्रतिदिन काफी बढ़ता जा रहा है. जैसे जैसे मनुष्य मानसिक एवं आधुनिक युग की तरफ अग्रसर हो रहे है, वो अपने शरीर के पोषक तत्व युक्त, गुणकारी, पाचनशील, स्वादिष्ट उपयोगी सब्जी भी अपने भोजन में लेना पसंद कर रहे है. मशरूम से हमारे शरीर को काफी मात्रा में प्रोटीन, खनिज-लवण, विटामिन बी, सी व डी मिलती है जो अन्य सब्जियों की तुलना में काफी ज्यादा होती है. इसमें मौजूद फोलिक अम्ल की उपलब्धता शरीर में रक्त बनाने में मदद करती है, इसका सेवन मनुष्य के रक्तचाप, हृदयरोग, में लाभकारी होता है.

वैसे तो मशरूम की खेती कई जगह की जाती है लेकिन, यहां हम जानेंगे की कैसे किसान कम लागत में इसकी खेती करके ज्यादा मुनाफा कमा सकता है.

बटन मशरूम उगाने का सही समय :-

बटन मशरूम उगाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के महीने में होता है, इन छ: महीनों में दो फसलें उगाई जाती हैं. बटन खुम्बी की फसल के लिए आरम्भ में 220-260 तापमान की आवश्यकता होती है, इस ताप पर कवक जाल बहुत तेजी से बढ़ता है बाद में इसके लिए 140-180 ताप ही उपयुक्त रहता है. इससे कम ताप पर फलनकाय की बढ़वार बहुत धीमी हो जाती है.

कम्पोस्ट बनाने की विधि

बटन मशरूम की खेती एक विशेष प्रकार की खाद पर ही की जाती है जिसे कम्पोस्ट कहते हैं.  मशरूम कम्पोस्ट तैयार करने के लिए किसी विशेष मूल्यवान मशीनरी या यन्त्र की जरूरत नही पड़ती है. कम्पोस्ट बनाने में निम्न प्रकार की सामग्री काम में ली जाती है:

गेहूं या चावल का भूसा 1000 किलोग्राम, अमोनियम सल्फेट, केल्शिम अमोनियम नाईट्रेट-27 किलोग्राम, सुपरफौसफेट-10 किलोग्राम, यूरिया-17 किलोग्राम, गेहूं का चोकर 100 किलोग्राम जिप्सम 36 किलोग्राम.

कम्पोस्ट शेड में ही तैयार किया जाता है. कम्पोस्ट तैयार करने में करीब 28 दिन का समय लगता है. सबसे पहले समतल एवं साफ फर्श पर भूसे को 2 दिन तक पानी डाल कर गिला किया जाता है, इस अवस्था में भूसे में नमी 75 प्रतिशत होनी चाहिए और भूषा अधिक गिला नही होना चाहिए. 2 दिन तक पानी गिराने के बाद फिर भसे को तोड़ कर देखें भूसा अन्दर से सुखा न हो तो ठीक अन्यथा सुखा हो तो फिर से पानी मिलाएं. इस गीले भूसे में जिप्सम के अलावा सारी सामग्री को मिला कर उसे थोड़ा और गिला करें. इस बात का ध्यान रखें की पानी उसमे से बाहर न निकले फिर भूसे से एक मीटर चौड़ा एवं तीन मीटर तक लम्बा (लम्बाई कम्पोस्ट की मात्रा के अनुसार) और करीब डेढ़ मीटर ऊंचा चौकोर ढ़ेर बना लें. ढ़ेर को 2-3 दिन तक ऐसे ही पड़ा रहने दें. 3 दिन बाद ढ़ेर की पलटी शुरू करें, एवं ध्यान रखें की ढ़ेर का अन्दर का हिस्सा बाहर और बाहर का हिस्सा अन्दर आ जाए. पलटाई करने का विवरण निम्न सारणी में दिया गया हैः-

दिवस पलटाई विवरण

0-2 दिन - भूसे को गिला करना, जिप्सम को छोड़कर सारी सामग्री मिलकर पानी         छिड़क कर उसका ढ़ेर बना लें.

तीसरा दिन- पहली पलटाईःढेर को इस तरह तोड़े की ऊपर का हिस्सा निचे और निचे का हिस्सा ऊपर हो जाए. इस पर लिंडेन छिड़क दें ताकि मक्खियां न बैठे और आसपास फोर्मलिन 6 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें.

छठे दिन- दूसरी पलटाईः ढेर की दूसरी बार पलटाई करें.

नौवां दिन- तीसरी पलटाइ: जिप्सम को मिलकर पलटाई करें एवं पुनः ढ़ेर बना दें.

बारहवा दिन- चौथी पलटाईः पलटाई करके फोर्मलिन 6 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें.

पन्द्रहवां दिन- पांचवी पलटाई

अठारवा दिन     - छटी पलटाईःआस पास फोर्मलिन 4 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें.

इक्कीसवें दिन- सातवीं पलटाई करें और साथ ही कम्पोस्ट को सूंघ कर देखें यदि अमोनिया की गंध आ रही हो तो पलटाई ठीक से करें.

चौबीसवां दिन- आठवीं पलटाईः इस पलटाई में अमोनिया की गंध बिलकुल नहीं होनी चाहिए और यदि है तो एक बार और एक दिन बाद फिर से पलटाई करें नहीं तो पैदावार कम और प्रभावित होती है.

कम्पोस्ट में नमी की मात्रा देखने के लिए उसे मुट्ठी में ले कर दबाएं, यदि थोड़ा पानी उंगलियों के बीच नजर आये तो उपयुक्त है. यदि अधिक पानी रह गया है तो कम्पोस्ट को थोड़ा फैला दें जिससे अतिरिक्त नमी उड़ जाए.

सत्ताईसवां दिन-  कम्पोस्ट खाद बीज मिलाने(स्पानिंग) के लिए तैयार है.

बीजाई(स्पानिंग) -

मशरूम का बीज ताजा, पूरी बढ़वार लिए एवं अन्य फफूंद से मुक्त होना चाहिए. बीज की मात्रा एक क्विंटल कम्पोस्ट में .75 से 1 किलोग्राम होनी चाहिए. इस बीज को कम्पोस्ट में अच्छी तरह मिलाकर या तो पोलीथिन की थैलियों (12 इंच) या पोलीथिन शीट (6-8 इंच) पर शेल्फ में भर दें. पोलीथिन की थैलियों को ऊपर से मोड़ कर बंद कर देना चहिए जबकि शेल्फ पर अखबार ढ़क देना चाहिए. थैलियां 8 किलोग्राम कम्पोस्ट भरने के लिए उपयूक्त हो, इससे उत्पादन 10 किलोग्राम कम्पोस्ट के बराबर मिलता है. इस समय कमरे का ताप 250 से कम एंव नमी 70 प्रतिशत रखनी चाहिए. करीब 15 दिन बाद स्पान रन पूरा हो जाता है और उसके बाद केसिंग की आवश्यकता होती है.

केसिंग :-

केसिंग मिट्टी के लिए उपयुक्त मिश्रण इस प्रकार है :-

1. बगीचे की खाद (ऍफ वाई एम) दोमट मिट्टी (1:1)

2. ऍफ वाई एम 2 साल पुरानी बटन मशरूम की खाद (1:1)

3. ऍफ वाई एम दोमट मिट्टी रेती दो साल पुरानी बटन मशरूम की खाद (1:1:1)

उपरोक्त किसी भी एक मिश्रण को लें परन्तु मिश्रण-2 सर्वाधिक उपयुक्त एंव अधिक उपज देने वाला है. 8 घंटे तक पानी में भिगोना आवश्यक है. करीब 8 घंटे बाद पानी से निकालकर और सुखा कर केसिंग मिट्टी का निर्जीवीकरण फोर्मेलिन 6 प्रतिशत के घोल से करना चाहिए एवं उसे 48 घंटे तक बंद रखना चाहिए. उसके बाद इसे खोल कर 24 घंटे फैला कर रखें ताकि मिश्रण सूख जाए एवं स्पान रन कम्पोस्ट पर एक इंची मोटी परत इस केसिंग मिट्टी की लगनी चाहिए एवं पानी इस तरह छिडके की केवल केसिंग ही गीली हो. कमरे का तापमान 200 से कम एवं नमी 70-90 प्रतिशत के बीच होनी चाहिये साथ ही स्वच्छ हवा का आगमन होना चाहिए. केसिंग करने के लगभग 10-12 दिन के पश्चात इसमें छोटे छोटे मशरूम के अंकुरण बनने शुरू हो जाते हैं. इस समय से केसिंग पर 0.3 प्रतिशत कैल्सियम क्लोराइड का छिड़काव दिन में दो बार पानी के साथ जरूर करना चाहिए, जिससे मशरूम अगले 5-7 दिनों में बढ़कर पूरा आकर ले लेते हैं. इन्हें घुमाकर तोड़ लेना चाहिए, तोड़ने के बाद नीचे की मीती लगे तने के भाग को चाकू से काटकर अलग कर दें. एक बार केसिंग लगाने से ले कर करीब 80 दिन तक फसल प्राप्त होती रहती है.

मूल्य संवर्धन :-

मशरूम तोड़ने के बाद, आकार के अनुशार उनकी छटनी कर लें तथा 3 प्रतिशत कैल्शियम क्लोराइड घोल से धोकर उसे फिर साफ पानी से धोएं. इसे कपड़े पर फैला दें ताकि अतिरिक्त पानी सूख जाए फिर 250 ग्राम, 500 ग्राम के पैकेट बना कर सील कर दें एवं थैलियों में थोड़े कर दें और इसे रेफ्रीजिरेटर में 7-8 दिन तक रख सकते हैं. ताजा मशरूम भी बाजार में आसानी से बिक जाती है. मशरूम के अनेक उत्पाद जैसे आचार, चिप्स, बिस्कुट, सूप पाउडर, बढ़ियां, एवं नूडल्स आदि बना कर भी बेचा जा सकता है. 

लेखक : सरिता (पौध व्याधि विभाग),

कीर्ति सिंह, सुचित्रा ( प्रजनन एवं अनुवांशिकी विभाग ),

एवं जाट मोनीका ( कीट विज्ञान विभाग),

राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर

बटन मशरूम की खेती

बटन मशरूम निम्न तापमान वाले क्षेत्रों में अधिक उगाया जाता है। लेकिन अब ग्रीन हाउस तकनीक द्वारा यह हर जगह उगाया जा सकता है। सरकार द्वारा बटन मशरूम की खेती के प्रचार-प्रसार को भरपूर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। अब इसका उत्पादन 20 किग्रा. प्रति वर्गमीटर से अधिक है दस पहले तक प्रति वर्ग मीटर मात्र तीन किलो ही था। उत्तर प्रदेश में इसका अच्छा उत्पादन हो रहा है।"

बटन मशरूम की बीजाई या स्‍पानिंग

बटन मशरूम

मशरूम के बीज को स्‍पान कहतें हैं। बीज की गुणवत्‍ता का उत्‍पादन पर बहुत असर होता है, इसलिए खुम्‍बी का बीज या स्‍पान अच्‍छी भरोसेमंद दुकान से ही लेना चाहिए। बीज एक माह से अधिक पुराना भी नही होना चाहिए।

बीज की मात्रा कम्‍पोस्‍ट खाद के वजन के 2-2.5 प्रतिशत के बराबर लें। बीज को पेटी में भरी कम्‍पोस्‍ट पर बिखेर दें तथा उस पर 2 से तीन सेमी मोटी कम्‍पोस्‍ट की एक परत और चढ़ा दें। अथवा पहले पेटी में कम्‍पोस्‍ट की तीन इंच मोटी परत लगाऐं और उसपर बीज की आधी मात्रा बिखेर दे। उस पर फिर से तीन इंच मोटी कम्‍पोस्‍ट की परत बिछा दें और बाकी बचे बीज उस पर बिखेर दें। इस पर कम्‍पोस्‍ट की एक पतली परत और बिछा दें।"

बटन मशरूम की तुड़ाई 

बुवाई के बाद पेटी या थैलियों को वहां रख दें, हां पर उत्पादन करना हो। इन पर पुराने अखबार बिछाकर पानी से भिगो दें। कमरे में पर्याप्‍त नमी बनाने के लिए कमरे के फर्श व दीवारों पर भी पानी छिड़कते रहें। इस समय कमरे का तापमान 22 से 26 डिग्री सेंन्‍टीग्रेड और नमी 80 से 85 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए। अगले 15 से 20 दिनों में खुम्‍बी का कवक जाल पूरी तरह से कम्‍पोस्‍ट में फैल जाएगा। इन दिनों खुम्‍बी को ताजा हवा नही चाहिए इसलिए कमरे को बंद ही रखें।

बटन मशरूम की तुड़ाई

खुम्‍बी की बीजाई के 35-40 दिन बाद या मिट्टी चढ़ाने के 15-20 दिन बाद कम्‍पोस्‍ट के ऊपर मशरूम के सफेद घुंडिया देने लगती हैं, जो अगले चार-पांच दिनों में बढ़ने लगती हैं, इसको घूमाकर धीरे से तोड़ना चाहिए, इसे चाकू से भी काट सकते हैं।

किसानों की हो रही अच्छी कमाई

सहारनपुर जिले के रामपुर मनिहार ब्लॉक के मदनूकी गाँव में दर्जन से अधिक किसान मशरूम की खेती करने लगे हैं। मदनूकी गाँव के किसान सत्यवीर सिंह ने 2009 में कृषि विज्ञान केंद्र की सहायता से उन्होंने मशरूम की खेती की शुरूआत की। वो बताते हैं, "साल 2009 में मैंने मशरूम की खेती तीस कुंतल कंम्पोस्ट के एक छोटी सी झोपड़ी बनाकर शूरू की थी। आज मैं साल में लगभग 6000 बैग्स में बटन मशरूम लगाता हूं, और आठ हजार बैग आयस्टर मशरूम के लगता हूं।

वो आगे बताते हैं, "शुरू में मुझे परेशानी हुई थी, लेकिन केवीके वैज्ञानिक कुशवाहा जी से मैंने प्रशिक्षण लिया था और अब भी वो हमारी पूरी सहायता करते हैं। समय-समय पर वो आकर हमें बताते रहते हैं कि कैसे मशरूम की खेती को रोगों से बचाए, कैसे कम्पोस्ट बनाए ये सब जानकारी देते रहते हैं।" 

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